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ⓘ धारणा




                                     

ⓘ धारणा

६ धारणा: पतञ्जली भन्नु हुन्छ: देशबन्धश्चीत्तस्य धारणा । अथवा मनलाई बाहिर या भित्र कुनै एक प्रतीक वा शून्यमा एकाग्र गर्नु धारणाहो । आमा जसरी आफ्नो वालकबाट इच्छित कार्य गराउन मिठाइँ, खेलौना इत्यादी दिएर उसको मन लाइ भुलाइ राख्नुहुन्छ, रुन दिनुहुन्न, ठिक त्यसै गरेर धारणाले विभिन्न कल्पनाहरु र विषयहरु द्वारा मनलाइ बाँधी राख्न वा एकाग्र बनाइ राख्नमा सहयोग पु¥याउँछ । योग शास्त्रमा यस्ता ११२ धारणहरूको वर्णन गरिएको छ । कष्ट, पीडा,र छटपटाहटबाट मन एकाग्र हुन्छ । पे्रमको प्रगाढताले पनि एकाग्रता दिन्छ । कला, संगीत, भजन,कीर्तनबाट पनि मानसिक एकाग्रता आउछ । त्यस्तै गरेर भगवानको मुर्ति, कुनै चित्र, कुनै विन्दु, विभिन्न प्रतीकहरूमा मनको केन्द्रीकरण, निरन्तर उच्चारण भइरहने शब्दश्रवण, या स्पर्श द्वारा पनि मन लाई एकाग्र गर्न सकिन्छ । मन केन्द्रीकरण गर्नका लागि सैकडौ विषय या कल्पनाहरु हुन सक्दछन् । यिनै विषयहरु लाई धारणा भन्दछन् । विना धारण ध्यान हुनै सक्दैन । यो, मन लाई अड्काइ राख्ने भनौ या फसाई राख्ने प्रविधि हो ।

                                     
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